अक्सर खामोश रातें हम से कुछ कहती है

अक्सर खामोश रातें हम से कुछ कहती है
और जब तुझे पाने की चाहत हमे बढ़ती है
क्या मालूम कौन सा दिन आखरी हो
आज तुझे खुलकर हंसाने को अरमान बढ़ती है

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